
*फर्जी दस्तावेज बनवाकर जमीन हड़पने की नियत में सात लोगों के ऊपर एफआईआर दर्ज।*
*जिस में सामिल ग्राम पंचायत अधिकारी राजित राम यादव*
अम्बेडकर नगर विकास खण्ड जलालपुर थाना जलालपुर क्षेत्र ग्राम विशम्भर पुर (इमलीपुर) में एक और जमीनी फर्जीवाड़ा मामला प्रकाश में आया, सात लोगों के विरुद्ध मुकदमा पंजीकृत जिसमें ग्राम पंचायत अधिकारी राजित राम भी शामिल, मुकदमे मे धारा 419,420, 467,468, 471 लगा यह एफआईआर दिनांक 12/09/2023 को दर्ज करके बिबेचना की जा रही है अभी तक इस मामले में पुलिस किसी की भी गिरफ्तारी नहीं कर पाईं है। कहीं पुलिस मामले को रफा-दफा करने में तो नहीं लगी। गौर तलब है कि पांच महीने बीतने वाला है अभी विवेचना ही चल रही है आखिर इतने बड़े फर्जी वाड़े को अंजाम दे दिया जाता है लेकिन जिम्मेदार अधिकारियों को भनक तक नहीं लगती फिलहाल देखा जाए तो जैसे तहसील टांडा क्षेत्र में फर्जी वाड़े का खुलासा हुआ था वैसे ही यहां भी एक मामला सामने आ गया आखिर जमीन हथियाना के लिए फर्जी दस्तावेजों को तैयार करके घटना को अंजाम दिया जाता है जबकि यह मामला ग्राम सभा से जुड़ा हुआ होता और ग्राम सभा का मुखिया ग्राम प्रधान होता है जिस तरीके से फर्जी वाड़ा किया जाता है परिवार रजिस्टर की नकल दर्ज करना या फिर परिवार रजिस्टर से नाम न कटवाना और दूसरे परिवार रजिस्टर दर्ज करवा लेना क्या अधिकारी जांच पड़ताल नहीं करते हैं वही हाल ग्राम पंचायत अधिकारी राजित राम यादव के द्वारा यह घटना को अंजाम दिया गया। मजे की बात यह है कि राजित राम यादव ग्राम पंचायत अधिकारी के ऊपर एफआईआर दर्ज होने के बाद भी आज विकास खण्ड बसखारी में कार्यरत है । पुलिस प्रशासन विवेचना कर रही है लेकिन सभी गिरफ्त से बाहर है आखिर सात-सात लोगों के ऊपर एफ.आई.आर. दर्ज होना और सलाखों के पीछे न जाना यह बहुत बड़े घटना का अंजाम दे सकते हैं विकासखंड बसखारी में ऐसी घटना को लेकर पूजा चौरसिया को निलंबित कर दिया गया था लेकिन महिला कर्मचारी होने के नाते निलंबित कर दिया गया आखिर राजित राम ग्राम पंचायत अधिकारी के ऊपर कार्रवाई क्यों नहीं? हुई यह प्रश्न उठ रहा है कि आखिर जबरा मारे दुबारा रोवै ना पावे यह कहावत अंबेडकर नगर में चरितार्थ हो रहा है अधिकारियों के ऊपर जनता भी सवाल उठाना शुरू कर दिया इतने बड़े घटनाओं को अंजाम देकर अभी सातों लोग पुलिस के चंगुल से बाहर होना यह साबित हो रहा है की पुलिस खाली हाथ झुनझुना बजा रही है आखिर क्या पुलिस सच्चाई की घटना तक पहुंच सकती है या फिर धूल फांकते रहेंगे या फिर घटना को अंजाम देने वाले जाएंगे सलाखों के पीछे यह सब चर्चा का विषय बना हुआ है फर्जी दस्तावेजों को तैयार करवा कर जमीन हड़पने का मुख्य सरगना पहलाद विश्वकर्मा के ऊपर विभिन्न धाराओं में राजेसुल्तानपुर थाने में मुकदमा पंजीकृत है मुकदमा अपराध संख्या 92/98, 200/20, 80/01, 101/22, 250/23, मुoअo संख्या 347/23 धारा 323, 354, 392 आपराधिक कानून (संशोधन) अधिनियम 1932 की धारा 7 एवं जलालपुर थाने में मुकदमा अपराध संख्या 269/23 धारा 419, 420, 467, 468, 471 का आखिर कब करवाई होगी जबकि ऐसा ही मामला विकासखंड बसखारी में सामने खुलकर आया था और जिलाधिकारी अविनाश सिंह ने मामले को संज्ञान में लेकर तीन-तीन अधिकारियों को निलंबित कर दिया था लेकिन यहां ऐसा कुछ नजर नहीं आ रहा है बस विवेचना ही चल रही है आखिरी अभी बेचना कब तक चलती रहेगी या फिर इस विवेचना में किसी का नाम हटाने या जोड़ने का सिलसिला चल रहा है। यह कहना बड़ा मुश्किल हो रहा है कि जनता को न्याय कैसे मिल पायेगा इसी कारण से न्याय मिलने में कई-कई वर्षों लग जाता है। कानून का लचीलापन यह साबित करता है की न्याय पाने के लिए कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है और वह ऐसे सिस्टम से लड़ भी नहीं पता क्योंकि न्याय पाने के लिए कई-कई वर्षों और रुपए का भी बर्बादी होता है इसलिए रुपया के आगे सच्चाई दम तोड़ देती है क्योंकि वह रुपया लड़ने के लिए गरीब के पास होता ही नहीं है फिलहाल देखना या होगा कि इस मामले में जिलाधिकारी एवं पुलिस अधीक्षक संज्ञान लेकर क्या कार्रवाई करते हैं







