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अपनी गेहूं की फसल को नीलाम करवाने के लिए दो दो दिन मंडी में परेशान होता किसान l

      रिपोर्ट:संदीप छाजेड़ आष्टा

*अवस्थाओं की भेट चढ़ आष्टा कृषि उपज मण्डी, जिम्मेदार हुए लापरवाह*।

 

आष्टा मध्यप्रदेश में अव्वल दर्ज में अपना स्थान रखने वाली नंबर वन कृषि उपज मण्डी आज स्थानीय मंडी प्रशासन के ढुल मूल रवेये और व्यापारियों की हठ धर्मिता के कारण किसानों के लिए भारी परेशानी का सबब बन गई है, आपको बता दे आष्टा कृषि उपज मंडी में बीते वर्षों में रहे तात्कालिक प्रशासनिक अधिकारी और कर्मचारियों की कर्तव्य निस्ठता और व्यापारियों की अपने व्यापार ने पारदर्शिता के साथ विवश्वसनीयता ही प्रमुख वजह रही है की आष्टा कृषि में आस पास के चार जिलों और आठ तहसील के किसान पूर्ण विश्वास के साथ अपनी उपज बेचने आते है , इस कारण खरीब के सीजन में सोयाबीन, और रबी के सीजन में गेंहू, चना मसूर राई आदि भारी मात्रा में किसान बेचने हेतु लाते है , और किसानों के साथ साथ व्यापारियों कि व्यापारिक तत्परता , और प्रशासनिक कार्यकुशलता से दोनो सीजन ने रोजाना लगभग 30 से 40 हजार बोरी उपज नीलाम होती रही है , किंतु इस बार किसानों का दुर्भाग्य कहे या प्रशासनिक शिथिलता , की व्यापारी पूरी तरह से हठ ध्रमिता पर उतर आए हे , और आज मंडी में उपजो की आवक भले ही 40 हजार बोरो की हो रही हो किंतु उपजो की नीलामी केवल आधी याने 19 से 20 हजार बोरी ही नीलाम हो रही है , ऐसे में स्वाभाविक है व्यापारियों की चल रही मनमानियों के कारण आज किसानों का माल पूरी तरह से नीलाम नही होने से किसान बेचारे दो ,दो , दिन तक काफी परेशान हो रहे है और कोई सुनने वाला नहीं है , ।

आज देश को आर्थिक आधार देना वाला देश की अर्थ व्यवस्था का प्रमुख घटक आज आष्टा मंडी में बहुत सारी परेशानियोका सामना कर रहा है , प्रांगण में न तो साफ पीने का पानी मिलता है और नही प्रांगण में समुचित सफाई व्यवस्था है जबकि पानी में जहा मंडी प्रशास लाखो रूपया सालाना खर्च करता है वही सफाई पर तो लाख रूपये से अधिक सफाई ठेकेदार को सफाई के नाम पर भुगतान होता है ।

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