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संत रविदास आध्यात्मिक कवि परोपकारी संत कुलभूषण थे

<img src=”https://samriddhbharatnews.com/wp-content/uploads/2024/02/IMG-20240224-WA0057-1024×705.jpg” alt=”” width=”1024″ height=”705″ class=”alignnone size-large wp-image-69146खगडिया
शहर से सटे कमलपुर ग्राम स्थित प्राथमिक विद्यालय के प्रांगण में माघी पूर्णिमां को संत शिरोमणि रविदास जी महाराज की 647 वीं जयंती समारोह धुमधाम से मनायी गई।समारोह का उद्घाटन अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति कर्मचारी संघ के जिला संरक्षक रामलखन प्रसाद पासवान तथा जन कल्याण संघ एक आवाज के राष्ट्रीय प्रवक्ता आचार्य राकेश पासवान शास्त्री ने संयुक्त रूप से दीप प्रज्वलित कर किया।वहीं साधु- संतों व प्रबुद्धजनों के द्वारा उनके तैलचित्र पर माला- पुष्प अर्पित कर नमन किया गया।इससे पूर्व गाजे-बाजे के साथ संत शिरोमणि रविदास जी के तस्वीरें वाहन पर सजाकर मन चंगा कठौती में गंगा का गगनभेदी उच्चारण के साथ नगर में भव्य झांकी निकाली गयी।
समारोह को संबोधित करते हुए रामलखन प्रसाद पासवान ने कहा कि संत रविदास जी के काम,क्रोध,लोभ,अहंकार और ईर्ष्या त्याग करने जैसी उत्तम विचार को अपनाकर ही समता- समानता का समाज स्थापित किया जा सकता है।वे पवित्र मन और कर्म के पुजारी थे।
जबकि अपने संबोधन में आचार्य राकेश पासवान शास्त्री ने कहा कि पन्द्रहवीं शताब्दी में अवतरित रहस्यवादी कवि,ज्ञानी,परोपकारी संत शिरोमणि रविदास जी महाराज वास्तव में संत कुलभूषण थे।उनके मन चंगा कठौती में गंगा तथा रैदास जन्म के कारने होत न कोई नीच,नर कू नीच कर डारि है, ओछे करम की नीच।प्रभु जी तुम चन्दन हम पानी, जाकी अंग – अंग बास समानी आदि दोहे व भजन आज भी प्रासंगिक हैं। वे जात-पात,ऊंच नीच, छूआछूत भेदभाव जैसे सामाजिक कुरीतियों पर करारा प्रहार कर मानव कल्याण के लिए मुखर रहे।
इस अवसर पर डॉ0 पुरातन गांधी,अशोक कुमार देव,महंथ सीयाराम गोस्वामी,शिक्षक शनातन पासवान,सेवा निवृत्त शिक्षक सुखनन्दन पासवान,डॉ0 श्रवण कुमार,सूरज दास,नवीन पासवान, महेश्वर राम,रंजीत सिन्हा एवं शिक्षक संजय गांधी आदि गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे।

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