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समाजवादी पार्टी ने हरदोई से ऊषा वर्मा और मिश्रिख से रामपाल राजवंशी को बनाया प्रत्याशी, ऊषा वर्मा की बीजेपी में शामिल होने की लग रही थी अटकलें, लगातार कई चुनाव हार चुकी है

रिपोर्ट अंकुल कुमार

हरदोई। सोमवार को समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने 31 लोकसभा हरदोई सुरक्षित और 32 लोकसभा मिश्रिख सुरक्षित से अपने प्रत्याशियों का ऐलान किया है। हरदोई से ऊषा वर्मा तो मिश्रिख से रामपाल राजवंशी को सपा ने अपना उम्मीदवार बनाया है।

ऊषा वर्मा तीन मर्तबा 1998, 2004 और 2009 में समाजवादी पार्टी के सिंबल से सांसद रह चुकी है, इसके बाद 2014 में उन्हें बीजेपी के अंशुल वर्मा ने हराया था। 2019 में हुए लोकसभा चुनाव में भाजपा के जय प्रकाश को जीत हासिल हुई थी और ऊषा को करारी हार का सामना करना पड़ा था।
ऊषा वर्मा 2003 में सपा सरकार में मंत्री भी रही है। 2002 में उन्होंने विधानसभा में जीत दर्ज की थी।
जोरों से थी बीजेपी में जाने की चर्चा
गुजरे बरस से ऊषा वर्मा के बीजेपी में शामिल होने की चर्चा चल रही थी। समाजवादी पार्टी में एक कद्दावर नेता रहे, जो अब बीजेपी में है उनके संपर्क में ऊषा थी। लेकिन टिकट की गारंटी न मिलने की वजह से उन्होंने बीजेपी का दामन नहीं थामा।�
ऊषा वर्मा का राजनीति उनके ससुर परमाई लाल की वजह से वजूद में आई जो पासी समाज के बड़े नेता थे और वर्ष1962 में सांसद चुने गए थे।�
वहीं 32 मिश्रिख लोकसभा से समाजवादी पार्टी ने रामपाल राजवंशी को अपना उम्मीदवार बनाया है, जो सपा सरकार में कारागार राज्य मंत्री रह चुके है। मूलरूप से वह सीतापुर जिले के निवासी है।�

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