बेतिया:- बिहार:- सेमरा थाना से जहाँगीर अंसारी कि रिपोर्ट
(आइये जानते हैं नये कानून के बारे में।)
1 जुलाई से भारत अपने औपनिवेशिक युग के आपराधिक तथ्यों को तीन नए आपराधिक तथ्यों के साथ बदल देगा। भारतीय दंड संहिता 1860 की जगह भारतीय न्याय संहिता या बीएसएस, दंड प्रक्रिया संहिता 1973 की जगह भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता या बीईएनएसएस और भारतीय साक्ष्य अधिनियम, 1872 की जगह भारतीय साक्ष्य अधिनियम या बीईईएसबीएस लागू होगा।
इनसाइड को पहली बार केंद्र ने पिछले साल 11 अगस्त को पेश किया था, जिसके बाद उन्हें समीक्षा के लिए भाजपा सांसद बृजलाल की अध्यक्षता वाली 31 संसदीय स्थायी समिति के पास भेजा गया था। बाद में 12 दिसंबर को केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कांग्रेस में प्रस्ताव पेश किया और 25 दिसंबर को राष्ट्रपति की मंजूरी मिली।
इस ब्लॉग को पिछले साल संसद के दोनों सदनों में ध्वनिमत से बनाया गया था।
इस टिप को दोनों सदनों से पास करते समय मात्र पांच घंटे की बहस की गई थी और ये वो समय था जब संसद से विपक्ष के 140 से अधिक सांसदों को निलंबित कर दिया गया था।
उस समय विपक्ष और क़ानून के जानकारों ने कहा था कि जो क़ानून देश की न्याय व्यवस्था को बदल कर रखेगा, उस पर संसद में मुक़म्मल बहस होनी चाहिए थी।
