
जिला स्तरीय कार्यक्रम में कलेक्टर सुश्री नम्रता गांधी ने माताआें को संबोधित करते हुए कहा कि बच्चों को खेल-खेल में सीखने का यह प्रयास सराहनीय है और यह प्रयास और भी विशेष हो जाता है जब मातायें इसमें शामिल होती है। मां बच्चें की पहली गुरू होती है, माताओं के छोटे-छोटे प्रयासों से बच्चों को बहुत कुछ सीखने को मिलता है। हर माता चाहती है कि उनका बच्चा आगे बढ़े, पढ़ाने का तनाव न ले। खेलकूद, कला भी शिक्षा का अंश है। अगर परिवार के सदस्य मिलकर बच्चों को छोटी-छोटी चीजें सीखाये ंतो घर में पढ़ाई का माहौल बनता है, जिससे बच्चे का बौद्धिक विकास होता है।
इस अवसर पर पार्षद राजेश ठाकुर ने भी कार्यक्रम को भी संबोधित किया। अंगना में शिक्षा कार्यक्रम की एसआरजी प्रीति शांडिल्य, डीआरजी श्रीमती अनुसुईया सिन्हा, माया खत्री को कलेक्टर ने प्रमाण पत्र प्रदान कर सम्मानित किया। इस अभियान में अपनी महत्वपूर्ण्ार् भूमिका निभाने वाली शिक्षिका श्रीमती रूपल चंदेल, श्रीमती अनुराधा सोरी और प्रिया कामड़े को को भी प्रमाण पत्र प्रदान किया। कार्यक्रम में उपस्घ्थित वहीं स्मार्ट माता के रूप में मिथला रजक, महेश्वरी जोशी और शीलू बंजारे को भी सम्मानित किया। इस अवसर पर माताओं ने अंगना में पढ़ाई कार्यक्रम अंतर्गत बच्चों को सीखायी जाने वाली बातों से बच्चों के मानसिक एवं शारीरिक विकास पर पड़ने वाले प्रभावों को भी साझा किया।
गौरतलब है कि प्रदेश में माताओं को जोड़कर बच्चों को घर पर ही सीखने में सहयोग देने के लिए अंगना में शिक्षा कार्यक्रम आयोजित किया जा रहा है। कार्यक्रम में बीईओ अमित तिवारी, प्राचार्य श्रीमती बीना मैथ्यू, एपीसी एनके साहू, के अलावा अन्य गणमान्य नागरिक एवं शिक्षक-शिक्षिकायें उपस्थित थे।
