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कैमूर जिला की यह दलित बस्ती अपनी मूलभूत सुविधाओं से वंचित है

vande bharat live tv news कैमूर बिहार से अफसार आलम की रिपोर्ट

आजादी के 77 साल बाद भी इस दलित बस्ती का विकास नहीं हो पाया

चापाकल से पानी नहीं आ रहा है। नल_जल योजना क्या होता हैं पता ही नहीं है। आवास के नाम फूस की झोपड़ी है। सड़क कच्ची पगडंडी जैसी है। और भी बहुत कुछ…

 

जबकि मेरा मानना है किसी भी व्यक्ति के लिए मूलभूत सुविधाएं बहुत ही जरूरी होती हैं जैसे बुनियादी मूलभूत सुविधाओं में #आवास, #सड़कें, #पानी और #बिजली शामिल हैं। लेकिन कैमुर जिले के सिरसी गांव में इन महादलित परिवारों में आज भी मूलभूत सुविधाओं से लोग कोसों दूर हैं।

 

यहां आज भी ग्रामीण वैसे ही जीवन यापन कर रहे हैं जैसे आजादी के पहले किया जाता था। आजादी के दशकों बाद भी ग्रामीण क्षेत्रों में मूलभूत सुविधाओं के लिए लोग आज भी तरस रहे हैं। सरकार की तरफ से दी जाने वाली योजनाओं का भी लाभ नहीं मिल पा रहा है।

 

विकास के नाम पर मंचों से जनप्रतिनिधि-प्रशासन भले ही कितना ही ढिंढोरा पीट ले लेकिन #ग्राम_पंचायत #मदुरना के अंतर्गत महादलित परिवारों के बीच जमीनी हकीकत कुछ और ही बयां करती नजर आ जाएगी। शासन-प्रशासन के जिम्मेदारों को इससे कोई सरोकार नहीं है।

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