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पिता रोटी है, कपड़ा है, मकान है, पिता छोटे से परिंदे का बड़ा आसमान 

पिता रोटी है, कपड़ा है, मकान है, पिता छोटे से परिंदे का बड़ा आसमान

फादर्स डे पर मां शारदा समिति का अभिनव कार्यक्रम: पिताओं का भव्य सम्मान

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बैतूल। फादर्स डे पर मां शारदा सहायता समिति द्वारा अभिनव कार्यक्रम का आयोजन किया गया जिसमें घर-घर जाकर पैर पखारकर पिताओं का भव्य सम्मान किया गया। इस कार्यक्रम में 81 वर्ष के एल. सोनी, पूर्व लेखाधिकारी जिला शिक्षा बैतूल, का आरती उतारकर, साल, श्रीफल भेंट कर, और गंगा जल से पैर पखारकर सम्मान किया गया।

इसी प्रकार बैतूल बाजार निवासी शिवकुमार शुक्ला, पूर्व कॉमर्स संकाय प्रमुख जयवंति हकसर महाविद्यालय बैतूल, को शिक्षा के क्षेत्र में विशेष योगदान हेतु पैर पखारकर, आरती उतारकर, साल, श्रीफल से स्वागत किया गया। साथ ही स्वास्थ्य के क्षेत्र में विशेष सेवा हेतु दशरथ पांसे जी का आरती उतारकर, पैर पखारकर, साल और श्रीफल से सम्मान किया गया।

इस अवसर पर संजय शुक्ला, प्रीतम सिंग मरकाम, पंजाबराव गायकवाड, शैलेंद्र बिहारिया, कार्यकारी अध्यक्ष हिमांशु सोनी, ओजवल पांसे, तूलिका पचौली, प्रमिला धोत्रे, राजेश शुक्ला, विवेक शुक्ला, और श्रीमती निमिषा शुक्ला विशेष रूप से उपस्थित थे।

कार्यक्रम में शैलेंद्र बिहारिया ने कहा, “पिता पालन है, पोषण है, परिवार का अनुशासन है। पिता धौंस से चलने वाला प्रेम का प्रशासन है। पिता रोटी है, कपड़ा है, मकान है। पिता छोटे से परिंदे का बड़ा आसमान है।” पंजाबराव गायकवाड ने कहा, “माता-पिता के चरणों में ही संसार होता है।” प्रीतम सिंग मरकाम ने कहा, “महाभारत में यक्ष प्रश्न के जवाब में युधिष्ठिर ने कहा था कि वायु से भी तेज मन है, तिनकों से ज्यादा चिंता है और धरती से भारी मां है और आकाश से ऊंचा पिता है। इस जवाब को सुनकर यक्ष ने चारों भाइयों को प्राणदान दिया था। पिता का महत्व दुनिया में आकाश से ऊंचा है।” संजय शुक्ला ने कहा, “घर में जीवित रूप में माता-पिता भगवान हैं, उनका सम्मान अवश्य करें।”

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