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*विकृति को त्यागकर संस्कृति को अपनाकर सनातन धर्म की पताका को फहराकर समाज का कल्याण संभव है देवी सुदीक्षा*

 

 

*विकृति को त्यागकर संस्कृति को अपनाकर सनातन धर्म की पताका को फहराकर समाज का कल्याण संभव है देवी सुदीक्षा*

 

 

नगर के सरस्वती सत्संग भवन में श्री श्री 1008स्वामी रामानद सरस्वती जी की कृपा से आयोजित श्री विग्रह स्थापना वार्षिक उत्सव के तीसरे दिन आयोजित कार्यक्रम में संत देवी सुदीक्षा ने कहा कि आज सनातन धर्म को मजबूत करने के लिए विकृतियों को त्याग कर संस्कृति को अपनाकर ही सनातन धर्म की ध्वजा को फहराया जा सकता है उन्होंने कहा कि आज हमे अपने बच्चो को संस्कारित बनाते हुए उन्हें धर्म के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देनी चाहिए उन्होंने कहा कि संस्कार संस्कृति का कोई टॉनिक कही बाहर नही मिलता अपितु घर से दिए संस्कार ही बच्चो को महान बनाते है उन्होंने श्रद्धा और विश्वास से ही प्रभु प्राप्ति की बात बताते हुए विभिन्न देवी देवताओं के कई प्रसंग सुनाकर श्रोताओं को मंत्रमुग्ध किया

इस मौके पर नाथीराम सिंघल सुरेंदर चौहान मामराज राजीव कालड़ा गुरुदयाल चुग सुभाष चुग भोपाल सैनी श्याम सुंदर अरोड़ा महेश सैनी बारूमल सैन बॉबी बत्रा राजीव चुग गगन चुग अरविंद गुप्ता कमला शशि सुनीता सुषमा सोनिया सोनम आदि सैकड़ों श्रद्धालु मौजूद रहे

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