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पवन सिंह पर पांच केस दर्ज, 2 करोड़ की गाड़ी से रोड शो और बुलडोजर से बरसाए गए फूल बने कांटे ?

भोजपुर के पावर स्टार पवन सिंह (Pawan Singh) एक बार फिर चर्चा में हैं। जी हां, पहली बार चर्चा में तब आए जब उन्हें बीजेपी ने पश्चिम बंगाल के आसनसोल से टिकट दिया। दूसरी बार चर्चा में तब आए जब आसनसोल से चुनाव लड़ने से इनकार कर दिया। तीसरी बार उन्होंने एक्स पर घोषणा कर चर्चा बटोरी। उन्होंने एक्स पर लिखा कि मां के कहने से वे चुनाव जरूर लड़ेंगे। चौथी बार चर्चा में तब आए, जब उन्होंने काराकाट लोकसभा क्षेत्र को चुना। पवन सिंह बिहार में एनडीए के उम्मीदवार उपेंद्र कुशवाहा के विरोध में काराकाट लोकसभा क्षेत्र से चुनाव लड़ने की घोषणा कर चुके हैं। इसी क्रम में वे वहां प्रचार के लिए गए थे। भोजपुरी स्टार होने के साथ पूरे लाव-लश्कर के साथ उन्होंने इलाके में प्रचार किया।

पांच थानों में मामला दर्ज

दो करोड़ की गाड़ी और बुलडोजर से फूल बरसाना मीडिया में चर्चा का विषय बन गया। अब पवन सिंह (Pawan Singh) पर पांच थानों में आदर्श आचार संहिता के उल्लंघन के पांच मामले दर्ज हो गए हैं। ये मामले बिना अनुमति के वाहन का प्रयोग करने को लेकर किए गए हैं। जी हां, चुनाव आयोग के निर्देशानुसार प्रचार में जाने वाले वाहन और उसकी संख्या को लेकर परमिशन लेना पड़ता है। पवन सिंह (Pawan Singh) ने ये जरूरी नहीं समझा और उनके सलाहकारों ने उन्हें सलाह नहीं दी। उसके बाद उनके खिलाफ पांच केस दर्ज कर दिए गए हैं। पांचों केस आदर्श आचार संहिता के बताए जा रहे हैं। पवन सिंह पर बिक्रमगंज अनुमंडल के पांच अलग-अलग थानों में आदर्श आचार संहिता का मामला दर्ज किया गया है। रोड शो के दौरान पवन सिंह और उनके समर्थकों ने बिना परमिशन के ज्यादा वाहनों का प्रयोग किया था।

आदर्श आचार संहिता का मामला

पवन सिंह पर दर्ज प्राथमिकी में साफ लिखा गया है कि पवन सिंह को केवल पांच चार पहिया वाहनों की स्वीकृति प्रदान की गई थी। जबकि 15 से 20 गाड़ियां उनके रोड शो में नजर आईं। वहीं 25 से 35 बाइक भी पवन सिंह के रोड शो में शामिल थे। जिसे प्रशासन की ओर से आचार संहिता का उल्लंघन माना गया है। बताते चलें निर्वाचन विभाग इस वक्त काफी सख्ती से सभी रैलियों और रोड शो पर निगाह रख रहा है। निर्वाचन विभाग सीसीटीवी फुटेज, मीडिया के कैमरे से ली गई तस्वीरों और अन्य किसी भी माध्यम से प्राप्त जानकारी के आधार पर कार्यवाही कर रहा है। निर्वाचन विभाग के एक अधिकारी की माने तो ऑडियो या विजुअल किसी माध्यम से भी यदि आचार संहिता का उल्लंघन होता नजर आया तो चुनाव विभाग इस पर कार्रवाई कर सकता है।

 

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