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भरत चरित का वर्णन सुन श्रोता हुए भावविभोर

 

 

जौनपुर। शाहगंज शाहपंजा स्थित संगत जी मंदिर में नौ दिवसीय पावन श्री रामकथा के सातवें दिन पूर्वांचल के प्रसिद्ध कथा वाचक दुर्गविजय मिश्र महराज ने वनगमन के बाद भरत मिलाप की कथा भक्तों को सुनाई। उन्होंने कहा कि भगवान की चरण पादुका लेकर अयोध्या वापस लौटे भरत सिंहासन पर रखकर पादुका के आदेश से राजपाट का कार्य देखने लगे। कथावाचक ने नवधा भक्ति पर प्रकाश डालते राम चरित मानस से सीखने की सलाह भक्तों को दी।

नंदी गांव में कुटी बनाकर भरत जी ने कुटिया में निवास कर भगवान राम की पादुका का पूजन करते हुए भजन कीर्तन में लीन हो गए। भगवान चित्रकूट से अरण्यकांड में प्रवेश के बाद इंद्र के पुत्र जयंत द्वारा सीता माता जी के चरण में चोंच का प्रहार किए जाने पर भगवान ने जयंत को दंड दिया। सीता हरण की कथा के बाद रावण जटायु युद्ध के बाद सीता जी को लंका के अशोक वाटिका में रखने के बाद महिला सैनिकों की देखरेख में समय बिता रही थी, उसी समय भगवान राम द्वारा दी गई मुद्रिका लेकर हनुमान ने लंका में प्रवेश किया। मुद्रिका सीता जी को देकर उन्होंने अपना परिचय बताया। माता की आज्ञा से हनुमान जैसे ही फल खाने लगे कि सैनिकों द्वारा उन्हें पकड़कर रावण के दरबार में ले जाया गया। पूछ में आग लगने के बाद हनुमान जी ने लंका को विध्वंस कर वापस श्री राम के यहां वापस लौटकर सारी बात बताई। कथा आयोजक समाजसेवी अनिल कुमार मोदनवाल ने प्रभु श्री राम का भक्तो श्रोताओ को प्रसाद वितरण किया। चंदन तिलक श्री राम के भेष में भक्तों ने खूब राम कथा में अपनी खुशी का इजहार किया।

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