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सरकारी राजस्व की हानि एवं बच्चों की पढ़ाई का हो रहा है नुकसान, अध्यापन के समय प्राइवेट एनजीओ भारत स्काउट और गाइड का करते हैं कार्य

सरकारी राजस्व की हानि एवं बच्चों की पढ़ाई का हो रहा है नुकसान, अध्यापन के समय प्राइवेट एनजीओ भारत स्काउट और गाइड का करते हैं कार्य

 

 

हाथरस

रविंद्र कुमार शर्मा भारत स्काउट और गाइड जिला हाथरस में जिला संगठन आयुक्त पद पर 20 जुलाई 2005 से स्थाई नियुक्त होने के बावजूद एक षड्यंत्र रचकर श्री धीरेंद्र प्रताप सिंह सरकारी अध्यापक श्री मानक चंद्र इंटर कॉलेज लाड़पुर हाथरस को नियुक्त कर दिया गया।

मगर प्रधानाचार्य के अनुसार प्रादेशिक मुख्यालय लखनऊ से नियुक्ति पत्र और अधिकार पत्र प्राप्त नहीं हुए हैं।

सरकारी रिलीविंग पर महाविद्यालयों में प्राइवेट एनजीओ भारत स्काउट और गाइड के शिविर श्री धीरेंद्र प्रताप सिंह कराते हैं। और वहां से मानदेय एवं अन्य खर्चे भी प्राप्त करते हैं।

एक सरकारी वेतन भोगी दो -दो वेतन पाता है। सरकारी इंटर कॉलेज के छात्रों को श्री धीरेंद्र प्रताप सिंह के स्थान पर कौन पढ़ाता है ? या फिर सरप्लस स्टाफ है। सरकारी राजस्व की हानि एवं बच्चों की पढ़ाई का नुकसान हो रहा है। क्या वर्षों से आयकर विभाग में अपने सरकारी वेतन के साथ-साथ प्राइवेट एनजीओ भारत स्काउट गाइड की आय को दर्शाते हैं?

आयकर विभाग द्वारा जांच होनी अति आवश्यक है । भारत स्काउट और गाइड जिला हाथरस के बैंक खाते की जांच होनी चाहिए। प्राइवेट एनजीओ भारत स्काउट और गाइड के नाम पर बच्चों द्वारा शुल्क भी लिया जाता है। उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा अनुदान भी प्राप्त होता है। स्वतंत्र दलों द्वारा एवं विद्यालयों, कॉलेजों,महाविद्यालयों, द्वारा नवीनीकरण शुल्क भी जमा किया जाता है।

जिला संगठन आयुक्त स्काउट प्राइवेट एनजीओ भारत स्काउट और गाइड पद पर सरकारी अध्यापक को नियुक्त नहीं किया जा सकता। क्योंकि सभी विद्यालयों, कॉलेजों, महाविद्यालयों, में उसी समय जाना होता है जब विद्यालय खुले हों। और सभी कॉलेजों का खुलने का समय एक ही होता है।

भारत स्काउट और गाइड प्राइवेट एनजीओ का कार्य एक सरकारी अध्यापक करता है तो वह अपने कॉलेज में छात्रों को कब पढ़ायेगा? शिक्षा महानिदेशक के आदेशानुसार अपने कॉलेज में अध्यापन के समय प्रधानाचार्य प्रवक्ता अन्य कोई कार्य नहीं करेंगे।

मा० मुख्यमंत्री उत्तर प्रदेश सरकार, महामहिम राज्यपाल महोदय सहित प्राइवेट एनजीओ भारत स्काउट और गाइड के सभी उच्च अधिकारियों को पत्र लिखे गए हैं। मगर जांच ठंडे बस्ते में है।

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