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बेलगाम बोल और निजी हमले राजनीतिक दलों को पड़ेंगे भारी ! 

‘ बेलगाम बोल और निजी हमले राजनीतिक दलों को पड़ेंगे भारी !

 

 

चुनाव आयोग की नई गाइडलाइन की तैयारी चुनाव प्रचार के दौरान इस्तेमाल हो रही ऐसी भाषा से चिंतित चुनाव आयोग जल्द ही सख्त कदम उठा सकता है । प्रचार में शालीनता बरतने जुड़े निर्देशों पर राजनीतिक दलों के अध्यक्षों से रिपोर्ट मांगी जा सकती है । मुख्य चुनाव आयुक्त ने लोकसभा चुनाव की तिथियों के एलान के दौरान भी राजनीतिक दलों को सतर्क किया था । चुनाव आयोग इसके साथ ही सभी राजनीतिक दलों के अध्यक्षों को नोटिस जारी कर यह जानकारी भी मांगने की तैयारी में है कि चुनाव प्रचार को लेकर पूर्व में उन्हें जो निर्देश दिए गए थे , उसका वह चुनाव प्रचार के दौरान किस तरह से पालन कर रहे है । आयोग का मानना है कि चुनाव प्रचार स्वस्थ और मुद्दा आधारित होना चाहिए । चुनाव की घोषणा के समय भी मुख्य चुनाव आयुक्त राजीव कुमार ने इसे लेकर राजनीतिक दलों को न सिर्फ आगाह किया था , , बल्कि उन्होंने इसे लेकर एक शायरी पढ़ी थी , जिसमें कहा था कि दुश्मनी जमकर करो , लेकिन यह गुंजाइश रहे कि जब मिले तो शर्मिंदा न हो । वहीं रहीम का एक दोहा भी पढ़ा था जिसमें कहा था कि रहिमन धागा प्रेम का मत तोड़ो चटकाय , टूटे सो फिर न जुडे , जुडे गांठ पड़ जाए । उनका कहना था कि इस डिजिटल युग में ऐसा कुछ भी न बोले , जो बाद में आपको सुनकर तकलीफ हो ।

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