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RTO की साइट पर अब नहीं देख पाएंगे गाड़ी मालिक का नाम और पता*

*मध्यप्रदेश परिवहन विभाग ने किया अपनी व्यवस्था में बदलाव*

*RTO की साइट पर अब नहीं देख पाएंगे गाड़ी मालिक का नाम और पता*

*नीमच । उज्जैन परिवहन विभाग ने वाहन मालिकों की निजता का ध्यान रखते हुए बड़ा बदलाव किया है। इसके तहत अब आरटीओ की साइट पर गाड़ी मालिक का नाम,पता नहीं देख पाएंगे। परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय के अंतर्गत अब वाहन-4 पोर्टल पर एक ही सिस्टम कर दिया गया है। मध्य प्रदेश का डेटा भी वाहन-4 पर स्थानांतरित किया जा चुका है।

मध्य प्रदेश में परिवहन विभाग की वेबसाइट पर किसी भी वाहन के रजिस्ट्रेशन नंबर की पूरी जानकारी अब नहीं दिखेगी। विभाग ने स्थायी तौर पर इसे बंद कर दिया है। अभी तक प्रदेश में किसी भी जिले की गाड़ी का रजिस्ट्रेशन नंबर डालकर वाहन मालिक का नाम, पता सहित पूरी जानकारी देखी जा सकती थी। इसी निजी जानकारी के सार्वजनिक होने के कारण निजता का ध्यान रखते हुए विभाग ने इसे बंद कर दिया है।

इस संबंध में पूर्व परिवहन आयुक्त ने स्मार्ट चिप कंपनी को पत्र लिखकर वाहन मालिक की निजता का हनन का हवाला देते वाहन के रजिस्ट्रेशन नंबर के आधार जानकारी साझा करने के विकल्प को बंद करने के निर्देश दिए थे। अभी तक परिवहन विभाग की वेबसाइट पर जाकर ई-सेवा विकल्प में वाहन के रजिस्ट्रेशन नंबर को डालने के बाद वाहन मालिक की पूरी जानकारी मिल जाती थी। अब सिर्फ वाहन का नंबर और वाहन के कलपुर्जों की जानकारी ही दिखती है। सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय की साइट पर अपने वाहन को जानने वाले विकल्प में लाग-इन आइडी व पासवर्ड बनाने के बाद खुद के वाहन की जानकारी ही दिखेगी। दूसरे का वाहन नंबर डालने पर नाम छिपा हुआ प्रदर्शित होता है।

*परिवहन व पुलिस के लिए एक्सेस*

परिवहन विभाग आंतरिक तौर पर वाहन मालिक की जानकारी को देख सकता है, इसके लिए एक्सेस दिया गया है। वहीं पुलिस को भी लाग-इन आइडी के आधार पर परिवहन विभाग का डेटा एक्सेस करने का अधिकार दिया गया है। ट्रैफिक नियमों को तोडऩे वालों को पकडऩे व अपराधों की विवेचना के लिए पुलिस को इसकी जरूरत पड़ती है।

नंबर व वाहन की जानकारी ही

मप्र के परिवहन विभाग की वेबसाइट पर वाहन का रजिस्ट्रेशन नंबर डालकर किसी की भी जानकारी प्रदान करना अब बंद कर दिया गया है। अब सिर्फ नंबर व वाहन की जानकारी ही रहती है। वाहन-4 पोर्टल में अब पूरे देश में एक समान व्यवस्था है।-संतोष मालवीय, आरटीओ, उज्जैन।

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